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Agra News:आगरा में करोड़ों की नकली दवा का खेल

by morning on | 2025-08-25 15:28:14

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Agra News:आगरा में करोड़ों की नकली दवा का खेल



कूरियर कंपनी संचालक सहित छह नामजद, रिश्वत में पेश किए गए एक करोड़ रुपये

Morning City

आगरा। ताजनगरी आगरा में करोड़ों रुपये की नकली दवाओं का काला कारोबार खुलकर सामने आ गया है। शनिवार को औषधि विभाग और एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई में इस घोटाले का पर्दाफाश हुआ, जिसके बाद एक और एफआईआर दर्ज की गई है। इस ताजा मुकदमे में एमएस कार्गो कूरियर कंपनी के संचालक यूनिस सहित छह लोगों को नामजद किया गया है। पुलिस और औषधि विभाग की जांच में सामने आया है कि कूरियर कंपनी के जरिए ही नकली दवाओं की सप्लाई का बड़ा नेटवर्क खड़ा किया गया था। एफआईआर में जिन आरोपियों के नाम दर्ज किए गए हैं, उनमें यूनिस, वारिस, विक्की, सुभाष कुमार, हिमांशु और फरहान शामिल हैं। आरोप है कि ये सभी मिलकर आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर आने वाले पार्सलों से नकली दवाओं को उठाकर कोतवाली क्षेत्र की बंसल मेडिकल और हे मां मेडिकल एजेंसी तक पहुंचाते थे।

हींग की मंडी से पकड़ा गया नकली दवाओं से लदा ऑटो
इस काले खेल का बड़ा राज उस समय खुला जब शुक्रवार को औषधि विभाग और एसटीएफ ने फव्वारा बाजार स्थित बंसल मेडिकल और हे मां मेडिको पर छापा मारा। रात में दुकानों और गोदामों को सील करने के दौरान टीम को सूचना मिली कि एक ऑटो में दवाओं के बोरे लाए जा रहे हैं। पाकीजा होटल के पास से होकर जब यह ऑटो हींग की मंडी पहुंचा तो टीम ने उसे रोक लिया। ऑटो से 87 लाख रुपये की नकली एंटी-एलर्जिक दवाएं बरामद की गईं। चालक ने अपना नाम आरि मलिक निवासी सैंया बताया। पूछताछ में उसने कबूला कि यूनिस और वारिस, जो रेलवे पार्सल ढुलाई का काम करते हैं, ने उसे 12 प्लास्टिक बोरे कैंट स्टेशन से उठाकर फरहान के कहने पर हे मां मेडिकल के मालिक हिमांशु अग्रवाल तक पहुंचाने का निर्देश दिया था। ऑटो चालक ने यह भी कहा कि फरहान और वारिस स्कूटी से उसके पीछे आ रहे थे लेकिन टीम को देखकर फरार हो गए।

कूरियर कंपनी से होती थी सप्लाई
ऑटो से जब्त हुए 12 बोरों के कागजात में एमएस लॉजिस्टिक्स का नाम सामने आया, जिसके तहत यह सप्लाई की जा रही थी। जांच में पता चला कि बोरों में नकली दवाएं थीं और इनके बिल भी संदिग्ध थे। टीम को 10 लाख से अधिक कीमत के दो टैक्स इनवॉइस भी मिले जो लखनऊ के फार्मा एजेंसियों के नाम जारी किए गए थे। लेकिन यह सभी कागजात फर्जी निकले।

कारोबारी ने दी एक करोड़ की रिश्वत की पेशकश
शनिवार को टीम ने हे मां मेडिको के मोती कटरा स्थित गोदाम पर दबिश दी। इस दौरान संचालक हिमांशु अग्रवाल ने अधिकारियों को लालच देने के लिए एक करोड़ रुपये की रिश्वत देने की कोशिश की। सहायक आयुक्त औषधि नरेश मोहन दीपक ने बताया कि एसटीएफ इंस्पेक्टर यतींद्र शर्मा ने इस रिश्वत के मामले में प्लान बनाकर हिमांशु अग्रवाल को रंगेहाथ पकड़ लिया।

साउथ के दवा माफियाओं से निकला कनेक्शन
पूछताछ में यह खुलासा हुआ कि हिमांशु अग्रवाल नकली दवा कारोबार में अकेला नहीं है, बल्कि उसका संबंध दक्षिण भारत के बड़े दवा माफियाओं से है। करोड़ों रुपये की दवाएं यहां से मंगाई जाती थीं और उत्तर प्रदेश के अलावा देश के कई राज्यों में सप्लाई की जाती थीं।

करोड़ों की दवाएं जब्त
एसटीएफ और औषधि विभाग की टीम ने अब तक 3.50 करोड़ रुपये की नकली दवाएं जब्त कर ली हैं। दुकानों और गोदामों में लाखों की दवाएं और भी पड़ी हैं, जिनकी जांच जारी है।

ऐसे खुला नकली दवा का खेल
पिछले कुछ सालों से एंटी एलर्जिक और एंटीबायोटिक दवाओं की खपत अचानक बढ़ने लगी थी, लेकिन कंपनियों की वास्तविक सेल में इजाफा नहीं हुआ। संदेह होने पर कंपनियों ने जांच कराई जिसमें नकली दवाओं का नेटवर्क सामने आया। शिकायत पर औषधि विभाग और एसटीएफ ने 20 दिन तक गुप्त जांच की और फिर संयुक्त छापेमारी में इस पूरे काले खेल का खुलासा हुआ।

29 हजार स्ट्रिप पर एक जैसा बार कोड
सेनोफी कंपनी के जीएम विवेक गौड़ ने बताया कि कंपनी की ओर से बनाई जाने वाली एंटी एलर्जिक ऐलेग्रा टैबलेट की हर स्ट्रिप पर अलग क्यूआर कोड होता है। लेकिन पकड़ी गई 29 हजार से अधिक स्ट्रिप पर जब स्कैन किया गया तो सभी पर एक जैसा बार कोड मिला। इससे साफ हो गया कि दवाएं नकली थीं। नकली दवाओं के इस बड़े काले कारोबार में एफआईआर के बाद गिरफ्तारियों की तैयारी है। पुलिस और एसटीएफ अब फरार आरोपियों की तलाश में जुट गई है। यह कार्रवाई दवा कारोबार की साख और मरीजों की सुरक्षा दोनों के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।

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