Hathras News: हाथरस में अफसर-नेता गठजोड़ पर उठे सवाल, चुनाव से पहले बढ़ी सियासी हलचल
personसंपादकीय टीम
calendar_today27 Apr 2026, 11:52 pm
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यूपी चुनाव 2027 से पहले हाथरस की जमीनी हकीकत पर घिरती सत्तारूढ़ पार्टी
हाथरस। उत्तर प्रदेश में आगामी 2027 विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं। राज्य की सत्ता में वापसी की चुनौती के बीच सत्तारूढ़ दल के सामने जमीनी स्तर पर संगठन और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। खासतौर पर ब्रज क्षेत्र के हाथरस जनपद को लेकर उठ रही चर्चाएं राजनीतिक गलियारों में ध्यान आकर्षित कर रही हैं।
प्रदेश की तीन विधानसभा सीटों वाले इस जनपद में फिलहाल दो सीटों पर भाजपा और एक पर सहयोगी दल का कब्जा है। जिला पंचायत से लेकर नगर निकायों तक सत्ता पक्ष की पकड़ मजबूत मानी जाती रही है। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर जनसमस्याओं और प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर असंतोष की स्थिति सामने आ रही है।
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स्थानीय लोगों के बीच चर्चा है कि जिले में प्रशासनिक अधिकारियों और कुछ जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल जनहित के बजाय निजी हितों की पूर्ति की ओर झुका हुआ है। आरोप हैं कि सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों के मामलों में प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही, जिससे भूमाफिया सक्रिय बने हुए हैं। कई मामलों में सांठगांठ की आशंका भी जताई जा रही है।
विकास कार्यों की स्थिति भी सवालों के घेरे में है। लंबे समय से लंबित यातायात सुधार, मेडिकल सुविधाओं के विस्तार और ट्रांसपोर्ट नगर जैसी परियोजनाओं में अपेक्षित प्रगति नहीं हो पाई है। जनसुविधाओं की कमी और अव्यवस्था को लेकर आम नागरिकों में नाराजगी देखी जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, कुछ विभागों जैसे लोक निर्माण, बिजली, जल निगम,वन विभाग ,समाज कल्याण , स्वास्थ्य सेवाएं, उप निबंधन कार्यालय,जिला उद्योग और परिवहन विभाग सहित आदि में भ्रष्टाचार की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। इन विभागों में कार्यप्रणाली को लेकर पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2024 के लोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश से मिले संकेतों के बाद सत्तारूढ़ दल के लिए आगामी विधानसभा चुनाव आसान नहीं होंगे। ऐसे में यदि स्थानीय स्तर पर संगठन और प्रशासनिक व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया, तो इसका असर चुनावी परिणामों पर पड़ सकता है।
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विपक्षी दल भी इन मुद्दों को लेकर सक्रिय हो गए हैं और जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। आने वाले महीनों में चुनावी माहौल और तेज होने के साथ ही हाथरस जैसे जनपदों की स्थिति प्रदेश की व्यापक राजनीतिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।फिलहाल नजर इस बात पर है कि सरकार प्रशासनिक स्तर पर उठ रहे आरोपों और जन असंतोष को दूर करने के लिए क्या कदम उठाती है।
