Agra News: ईदगाह जाकर धर्म परिवर्तन कर लूंगा’ कहने वाले आकाश अग्रवाल ने फिर भाजपा को दी पटखनी, 4,263 वोटों से जीते
personसंपादकीय टीम
calendar_today28 Oct 2026, 09:39 pm
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आगरा शिक्षक एमएलसी चुनाव में सपा का परचम, निर्दलीय से भाजपा और फिर सपा तक का सफर; मतदान में धांधली के आरोपों से लेकर मतगणना के दौरान विवाद तक सुर्खियों में रहे डॉ. आकाश अग्रवाल
आगरा। कभी मतदान में धांधली के आरोप, कभी मीडिया के सामने फूट-फूटकर रोना और कभी धर्म परिवर्तन के बयान से राजनीतिक हलचल मचाने वाले समाजवादी पार्टी के डॉ. आकाश अग्रवाल ने शिक्षक एमएलसी चुनाव में एक बार फिर भाजपा को शिकस्त दे दी। आगरा खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के नतीजों में आकाश अग्रवाल ने भाजपा प्रत्याशी हरि किशोर तिवारी को 4,263 मतों से हराकर अपनी जीत दर्ज की। चुनाव परिणाम ने उन्हें एक बार फिर आगरा की शिक्षक राजनीति के केंद्र में ला दिया है।
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14,046 वोट पाकर भाजपा को छोड़ा पीछे
मतगणना के घोषित आंकड़ों के मुताबिक, डॉ. आकाश अग्रवाल को 14,046 वोट मिले, जबकि भाजपा के हरि किशोर तिवारी 9,783 मतों पर सिमट गए। दोनों के बीच जीत का अंतर 4,263 मतों का रहा। चुनाव में कुल 29,865 मत पड़े, जिनमें से 2,128 मत अवैध घोषित किए गए। नतीजों ने साफ कर दिया कि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में आकाश अग्रवाल ने अपने प्रतिद्वंद्वी पर बढ़त बनाई।
धर्म परिवर्तन के बयान से मचा था सियासी तूफान
चुनाव के दौरान आकाश अग्रवाल का एक बयान खासा चर्चा में रहा। मतदान के दिन उन्होंने चुनाव में धांधली और शिक्षकों तथा वित्तविहीन विद्यालयों के प्रबंधकों को परेशान करने के आरोप लगाए थे। शिकायत लेकर अधिकारियों के पास पहुंचे आकाश मीडिया से बातचीत के दौरान भावुक होकर रो पड़े थे। इसी दौरान उन्होंने कहा था कि अगर उन्हें इसी तरह परेशान किया जाता रहा तो वह शाही ईदगाह जाकर धर्म परिवर्तन करा लेंगे। उन्होंने बौद्ध धर्म अपनाने की संभावना भी जताई थी और गौतम बुद्ध में अपनी आस्था का जिक्र किया था।

आकाश ने आरोप लगाया था कि अग्रवाल होने के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है और स्कूल प्रबंधकों के यहां पुलिस भेजकर दबाव बनाया जा रहा है। उनके बयान का वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई थी। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस मामले को उठाया था। हालांकि, उनके लगाए गए आरोपों की पुष्टि और उन पर हुई कार्रवाई को लेकर आधिकारिक तथ्यों को अलग से देखना जरूरी है।
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निर्दलीय जीते, भाजपा में गए, फिर सपा से मैदान में उतरे
डॉ. आकाश अग्रवाल का राजनीतिक सफर भी कम दिलचस्प नहीं है। वर्ष 2020 में उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में शिक्षक एमएलसी का चुनाव लड़ा था। उस चुनाव में उन्हें 6,690 वोट मिले थे, जबकि भाजपा के डॉ. दिनेश चंद्र वशिष्ठ को 4,314 मत मिले। आकाश ने 2,376 मतों से जीत दर्ज कर शिक्षक राजनीति में अपनी पहचान बनाई थी। इसके बाद वह भाजपा में शामिल हुए, लेकिन वर्ष 2026 के चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी में आ गए। सपा के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए उन्होंने एक बार फिर जीत हासिल की। इस तरह निर्दलीय प्रत्याशी से शुरू हुआ उनका सफर अब सपा प्रत्याशी के रूप में दूसरी जीत तक पहुंच गया है।
मानदेय और पुरानी पेंशन जैसे मुद्दों से बनाई पहचान
आकाश अग्रवाल की राजनीति का प्रमुख आधार वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों की समस्याएं रही हैं। वह शिक्षकों के लिए मानदेय, पुरानी पेंशन की बहाली, कैशलेस चिकित्सा सुविधा और अन्य सेवा संबंधी लाभों की मांग उठाते रहे हैं। शिक्षा के अधिकार का लाभ वित्तविहीन विद्यालयों के विद्यार्थियों तक पहुंचाने की पैरवी भी उनके एजेंडे में शामिल रही है। आगरा के शमसाबाद रोड स्थित कावेरी विहार निवासी डॉ. आकाश अग्रवाल फतेहाबाद क्षेत्र के कुंडौल स्थित साईनाथ कॉलेज से जुड़े हैं। उन्होंने पीएचडी की है और आगरा कॉलेज से एलएलबी की पढ़ाई पूरी की है। शिक्षकों के मुद्दों को लेकर सक्रियता ने उन्हें इस निर्वाचन क्षेत्र में राजनीतिक पहचान दिलाई।
मतगणना के दौरान फटे कुर्ते में बाहर आए थे आकाश
मंगलवार रात नवीन मंडी समिति में मतगणना के दौरान भी विवाद की स्थिति बनी थी। सपा प्रत्याशी आकाश अग्रवाल फटे कुर्ते में बाहर आए और उन्होंने भाजपा समर्थकों पर मारपीट करने का आरोप लगाया। इस घटनाक्रम के बाद दोनों दलों के समर्थकों के बीच तनाव की चर्चा तेज हो गई थी। हालांकि, इस मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
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वैश्य समाज के राजनीतिक समीकरण भी चर्चा में
शिक्षक एमएलसी चुनाव के दौरान वैश्य समाज से जुड़े राजनीतिक समीकरण भी चर्चा में रहे। आगरा दक्षिण के विधायक एवं कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय की वैश्य समाज को लेकर की गई टिप्पणी के बाद समाज के कुछ वर्गों में नाराजगी की बात सामने आई थी। सपा नेता विनय अग्रवाल ने भाजपा पर वैश्य समाज के वोटों को अपनी बपौती समझने का आरोप लगाया था और आगामी विधानसभा चुनाव में इसका नुकसान होने की आशंका जताई थी।
अब विधान परिषद में होगी असली परीक्षा
आकाश अग्रवाल की जीत केवल चुनावी आंकड़ों तक सीमित नहीं है। शिक्षक राजनीति में उनकी पहचान, दल बदलने का सफर, चुनाव के दौरान लगाए गए आरोप और धर्म परिवर्तन संबंधी बयान ने इस मुकाबले को लगातार चर्चा में बनाए रखा। अब शिक्षकों के मानदेय, पुरानी पेंशन, चिकित्सा सुविधा और वित्तविहीन विद्यालयों से जुड़े मुद्दों पर उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी। चुनाव जीतने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि शिक्षकों से जुड़े जिन मुद्दों के सहारे उन्होंने अपनी राजनीतिक पहचान बनाई, उन्हें आगे बढ़ाने में वह कितना प्रभावी साबित होते हैं।
