Kanpur Dehat: उपजिलाधिकारी के चालक पर बुजुर्गों की जमीन कब्जाने का आरोप विरोध करने पर जान से मारने की धमकी, न्याय के लिए दर-दर भटक रहे पीड़ित
personसंपादकीय टीम
calendar_today21 Mar 2026, 11:02 pm
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कानपुर देहात। कानपुर देहात की मैथा तहसील क्षेत्र में उपजिलाधिकारी के वाहन चालक पर तहसील रसूलाबाद क्षेत्र के दो बुजुर्ग भाइयों की जमीन पर अवैध कब्जा करने का गंभीर आरोप लगा है। पीड़ितों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इससे वे न्याय के लिए महीनों से अधिकारियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
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थाना रूरा क्षेत्र के रहने वाले दो बुजुर्ग भाइयों ने बताया कि करीब दो वर्ष पहले उन्होंने जीवन भर की मेहनत और जमा पूंजी से जमीन खरीदी थी। नौकरी के कारण वे लंबे समय तक बाहर रहे, लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद जब गांव लौटे तो सोचा था कि अपनी जमीन पर छोटा सा मकान बनाकर सुकून से जीवन बिताएंगे।
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लेकिन जब उन्होंने जमीन पर निर्माण कार्य शुरू करने की कोशिश की तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्हें पता चला कि उनकी खरीदी हुई जमीन पर पहले से ही कब्जा कर लिया गया है।
पीड़ितों का आरोप है कि गांव के ही कोमल यादव और उसके परिजनों ने जमीन पर अवैध कब्जा कर रखा है। जब उन्होंने अपनी जमीन खाली करने की बात कही तो उनके साथ अभद्रता की गई और उन्हें वहां से भगा दिया गया। इतना ही नहीं, गांव में दोबारा आने पर जान से मारने की धमकी भी दी गई।
पीड़ितों का कहना है कि आरोपी वर्तमान में मैथा तहसील के उपजिलाधिकारी का चालक है। इसी कारण उसे प्रशासनिक रसूख का लाभ मिल रहा है और तहसील स्तर के अधिकारी कार्रवाई करने से बच रहे हैं। बुजुर्गों का आरोप है कि उन्होंने उपजिलाधिकारी से लेकर जिला अधिकारी तक कई बार शिकायत की, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका।
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दोनों बुजुर्ग भाइयों का कहना है कि उन्होंने पूरी जिंदगी मेहनत कर जो पूंजी जोड़ी थी, उसी से यह जमीन खरीदी थी। अब उसी जमीन पर कब्जा हो जाने से वे मानसिक रूप से बेहद परेशान हैं। कई महीनों से वे न्याय की उम्मीद में अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कहीं से राहत नहीं मिल रही है।
बुजुर्गों का कहना है कि अब उन्हें अपनी जान और सुरक्षा की भी चिंता सता रही है। उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath से हस्तक्षेप कर जमीन खाली कराने और उन्हें सुरक्षा दिलाने की मांग की है।

इस मामले में प्रशासन का कहना है कि शिकायत की जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। हालांकि गांव और क्षेत्र के लोगों के बीच चर्चा है कि आखिर कब तक इन बुजुर्गों को उनकी जमीन वापस मिल पाएगी या फिर दबंगों का कब्जा ऐसे ही बना रहेगा।
