Agra News: एफएसडीए की छापेमारी के बाद सवाल—क्या अब नकली दवा कारोबारियों पर होगा बुलडोजर एक्शन?
personसंपादकीय टीम
calendar_today10 Jul 2026, 10:50 pm
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आगरा। जनस्वास्थ्य से जुड़े सबसे संवेदनशील मुद्दों में शामिल दवाओं की गुणवत्ता को लेकर आगरा में बड़ा एक्शन देखने को मिला। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने संदिग्ध दवाओं के नेटवर्क पर शिकंजा कसते हुए शहर के प्रमुख दवा बाजार में व्यापक छापेमारी की। कमिश्नर डॉ. रोशन जैकब के निर्देशन में आगरा समेत कई जिलों की संयुक्त टीमों ने कम्मू टोला स्थित वंश फार्मा, मोहन ट्रेडर्स और अन्य प्रतिष्ठानों पर घंटों तक जांच की। कार्रवाई के दौरान स्टॉक, बिल, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड और सप्लाई नेटवर्क से जुड़े दस्तावेजों को खंगाला गया। यह कार्रवाई केवल एक प्रतिष्ठान तक सीमित नहीं रही। एएस कॉम्प्लेक्स, मुबारक महल और अन्य दवा प्रतिष्ठानों पर भी टीमों ने दस्तावेजों का मिलान किया। अधिकारियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि संदिग्ध दवाओं की सप्लाई किन-किन जिलों और राज्यों तक हुई और इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं। जांच के घेरे में ऑक्साल्जिन डीपी, टेल्मा-40 और चेमोरल फोर्ट जैसे चर्चित ब्रांड भी हैं। अधिकारियों को आशंका है कि इन ब्रांडों के नाम पर संदिग्ध या नकली दवाओं का कारोबार किया गया हो सकता है। इसके साथ ही राजस्थान में प्रतिबंधित बताई गई आईपील और अनवांटेड-72 जैसी दवाओं की सप्लाई चेन की भी जांच की जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान श्री जी फार्मा से ऑक्साल्जिन डीपी की संदिग्ध सप्लाई के तार जुड़ने की बात सामने आई है। इसी क्रम में मोहन ट्रेडर्स की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। हालांकि विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रतिष्ठान की जिम्मेदारी जांच पूरी होने और साक्ष्यों के आधार पर ही तय की जाएगी। विभागीय रिकॉर्ड बताते हैं कि मोहन ट्रेडर्स पहले भी एफएसडीए की कार्रवाई के दायरे में आ चुका है। इससे पहले यहां से गेलवास मेट दवा के 40 कार्टन जब्त किए गए थे। जांच में उनकी सप्लाई पुदुचेरी से अर्जुन फार्मास्यूटिकल्स के माध्यम से होने की बात सामने आई थी। अब पुराने रिकॉर्ड और नए तथ्यों को जोड़कर पूरे नेटवर्क की फिर से गहन जांच की जा रही है।
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एफएसडीए अधिकारी स्टॉक का भौतिक सत्यापन, बैच नंबरों का मिलान, खरीद-बिक्री के बिलों की जांच और विभिन्न राज्यों के वितरकों से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल कर रहे हैं। संदिग्ध दवाओं के नमूने भी जांच के लिए सुरक्षित किए गए हैं ताकि प्रयोगशाला रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सके। यह कार्रवाई केवल कानून का मामला नहीं, बल्कि लाखों मरीजों की जिंदगी से जुड़ा सवाल भी है। यदि कोई व्यक्ति या प्रतिष्ठान मुनाफे के लिए दवाओं की गुणवत्ता से खिलवाड़ करता है, तो उसका सीधा असर मरीजों के जीवन पर पड़ता है। इसलिए इस पूरे मामले पर लोगों की निगाहें टिकी हैं।
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अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जांच पूरी होने के बाद क्या इस पूरे नेटवर्क का पूरी तरह खुलासा होगा? क्या दोषियों के खिलाफ केवल कागजी कार्रवाई होगी या कानून के तहत ऐसी सख्त कार्रवाई की जाएगी, जो भविष्य में जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों के लिए नजीर बने? एफएसडीए का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद जो भी व्यक्ति या प्रतिष्ठान दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम सहित अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने साफ किया है कि जनस्वास्थ्य से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अवैध कारोबार को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
