Kanpur Dehat: रिहायशी इलाके में ‘जहर’ उगल रही प्लास्टिक फैक्ट्री, पांच साल से जिम्मेदार खामोश

personसंपादकीय टीम
calendar_today14 Mar 2026, 10:42 pm

ईटीपी प्लांट बंद, केमिकल युक्त पानी से हैंडपंप दूषित होने का आरोप; स्कूल के 1000 बच्चों पर भी खतरा

कानपुर देहात। अकबरपुर तहसील क्षेत्र के जैनपुर स्थित रिहायशी इलाके में चल रही एक प्लास्टिक रिसाइक्लिंग फैक्ट्री अब स्थानीय लोगों के लिए गंभीर चिंता का कारण बन गई है। आरोप है कि फैक्ट्री से निकलने वाला जहरीला केमिकल युक्त पानी और धुआं पूरे इलाके की हवा, पानी और जमीन को दूषित कर रहा है। इससे आसपास रहने वाले लोगों में बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।

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मामले को लेकर कई बार शिकायतें किए जाने के बावजूद कार्रवाई न होने से नाराज स्थानीय लोगों ने इस बार जिला प्रशासन के साथ मुख्यमंत्री को शपथ पत्र (स्टाम्प पेपर) पर शिकायत भेजकर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

पांच साल से चल रही फैक्ट्री, कार्रवाई शून्य

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह फैक्ट्री पिछले पांच वर्षों से अधिक समय से आवासीय क्षेत्र में संचालित हो रही है। हैरानी की बात यह है कि इतने लंबे समय में न तो किसी जिम्मेदार अधिकारी ने इसकी गंभीर जांच की और न ही प्रदूषण को लेकर कोई ठोस कदम उठाया गया। इससे प्रशासनिक कार्यशैली और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।

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बंद पड़ा ईटीपी प्लांट, बिना शोधन छोड़ा जा रहा गंदा पानी

स्थानीय लोगों का आरोप है कि फैक्ट्री के अंदर लगा ईटीपी (इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) भी लंबे समय से बंद पड़ा है। इसके बावजूद फैक्ट्री से निकलने वाला केमिकल युक्त पानी बिना किसी शोधन के सीधे नालों और खुले स्थानों में बहाया जा रहा है। इससे साफ है कि फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और एनजीटी के नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।

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हैंडपंप का पानी भी हुआ दूषित

स्थानीय लोगों के मुताबिक फैक्ट्री से निकलने वाला दूषित पानी जमीन में समा रहा है, जिससे इलाके के हैंडपंप और भूजल भी प्रभावित हो गए हैं। कई लोगों का दावा है कि हैंडपंप का पानी अब पीने योग्य नहीं रह गया है और उसमें बदबू व रंग में बदलाव भी महसूस किया जा रहा है।

हरे-भरे पेड़ भी सूखने लगे

इलाके के लोगों का कहना है कि फैक्ट्री के आसपास लगे हरे-भरे पेड़-पौधे भी धीरे-धीरे सूखकर जर्जर हो चुके हैं। इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रदूषण का असर केवल इंसानों पर ही नहीं बल्कि पर्यावरण पर भी गंभीर रूप से पड़ रहा है।

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स्कूल के बच्चों पर भी खतरा

स्थानीय लोगों के अनुसार फैक्ट्री से महज करीब 50 मीटर की दूरी पर एक विद्यालय संचालित है, जहां लगभग एक हजार बच्चे पढ़ाई करते हैं। फैक्ट्री से निकलने वाले धुएं और बदबू का असर बच्चों के स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों में खांसी और सांस संबंधी समस्याएं बढ़ने लगी हैं।

विरोध पर धमकी का आरोप

स्थानीय लोगों का आरोप है कि जब उन्होंने फैक्ट्री संचालकों से प्रदूषण को लेकर शिकायत की तो उन्हें धमकियां दी गईं और कहा गया कि जहां शिकायत करनी है कर लो। इससे इलाके में भय और असुरक्षा का माहौल भी बन गया है।

अधिकारियों की चुप्पी पर उठे सवाल

इतनी गंभीर शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी लोगों को हैरान कर रही है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इतने वर्षों तक इस फैक्ट्री की अनियमितताओं पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई और यह फैक्ट्री किसके संरक्षण में संचालित होती रही।
फिलहाल स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी और मुख्यमंत्री से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर फैक्ट्री के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है या फिर यह फैक्ट्री यूं ही इलाके के लोगों के लिए खतरा बनी रहती है।
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