Agra News: नए सत्र में फिर ‘कमीशनखोरी’ का खेल, अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ा

personसंपादकीय टीम
calendar_today11 Apr 2026, 11:10 pm
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टीम पापा का आरोप—निजी स्कूल जबरन तय दुकानों से खरीद को कर रहे बाध्य, शिक्षा विभाग मौन

आगरा। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही जनपद के निजी विद्यालयों में किताब, कॉपी और स्कूल परिधानों की खरीद को लेकर कथित कमीशनखोरी का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ पेरेंट्स (टीम पापा) ने आरोप लगाया है कि स्कूल प्रबंधन अभिभावकों को निश्चित दुकानों और विद्यालय परिसर से ही सामग्री खरीदने के लिए बाध्य कर रहे हैं, जिससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। संगठन के संस्थापक एवं संरक्षक मनोज शर्मा ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि विभाग की निष्क्रियता के कारण विद्यालयों के हौसले बुलंद हैं। उनका कहना है कि हर साल नए सत्र में अभिभावकों को इसी तरह लूटा जाता है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं करते। परिणामस्वरूप अभिभावक मजबूरी में महंगे दामों पर किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने को विवश हैं। टीम पापा ने बताया कि उत्तर प्रदेश शिक्षा अधिनियम 2018/2020 के तहत किसी भी निजी विद्यालय को यह अधिकार नहीं है कि वह अभिभावकों को किसी विशेष दुकान या विद्यालय परिसर से सामग्री खरीदने के लिए बाध्य करे। नियमों में स्पष्ट प्रावधान है कि पहली शिकायत पर एक लाख रुपये, दूसरी पर पांच लाख रुपये का जुर्माना और तीसरी बार दोषी पाए जाने पर विद्यालय की मान्यता समाप्त की जा सकती है। इसके बावजूद पिछले कई वर्षों में न तो इस प्रकार की गतिविधियों पर रोक लग पाई है और न ही किसी विद्यालय के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सामने आई है।

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संगठन का आरोप है कि कई विद्यालयों में कक्षावार तैयार किए गए किताब-कॉपी और परिधान के पैकेट सीधे अभिभावकों को थमाए जा रहे हैं, जिससे विकल्प की गुंजाइश खत्म हो जाती है। विद्यालय परिसरों और संबंधित दुकानों में पैकेटों पर कक्षा और सेक्शन के अनुसार नंबरिंग कर उन्हें बेचा जा रहा है, जिसे टीम पापा ने कमीशनखोरी का स्पष्ट प्रमाण बताया है। टीम पापा ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस मामले में ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन अभिभावकों के साथ मिलकर आंदोलन की राह अपनाएगा। साथ ही शिक्षा विभाग से मांग की गई है कि नियमों का सख्ती से पालन कराते हुए दोषी विद्यालयों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि अभिभावकों को इस आर्थिक शोषण से राहत मिल सके।
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