Agra News: चौकी में हाईस्कूल छात्र से मारपीट का आरोप, दो दरोगा निलंबित; परीक्षा से पहले भविष्य पर संकट

personसंपादकीय टीम
calendar_today22 Feb 2026, 10:53 pm
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आगरा। किरावली थाना क्षेत्र की मिढ़ाकुर पुलिस चौकी में 16 वर्षीय हाईस्कूल परीक्षार्थी के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। गांव नानपुर निवासी करन का 18 फरवरी को अपने हमउम्र किशोर कार्तिक से विवाद हो गया था। दोनों के बीच हुई मारपीट के बाद कार्तिक पक्ष ने चौकी पर तहरीर दी थी। परिजनों के अनुसार 20 फरवरी को दोनों पक्षों को मिढ़ाकुर चौकी बुलाया गया। करन के ताऊ बबलू का आरोप है कि चौकी पर मौजूद दरोगाओं ने समझौता कराने के एवज में दस हजार रुपये की मांग की। परिवार का कहना है कि वे मजदूरी कर जीवनयापन करते हैं और इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थ थे। आरोप है कि इसी के बाद छात्र को चौकी में रोककर डंडे और पट्टे से पीटा गया।
शाम को जब परिजन चौकी पहुंचे तो करन बुरी तरह डरा हुआ था। उसका एक हाथ सूजा हुआ था और वह दर्द से कराह रहा था। परिवार उसे निजी चिकित्सक के पास ले गया, जहां फ्रैक्चर की आशंका जताई गई और प्लास्टर की सलाह दी गई। हालांकि परीक्षा को देखते हुए परिजन असमंजस में हैं, क्योंकि सोमवार से उसकी यूपी बोर्ड की हाईस्कूल परीक्षा शुरू होनी है। घटना की जानकारी मिलते ही डीसीपी पश्चिम आदित्य सिंह मौके पर पहुंचे और प्रारंभिक जांच कराई। जांच में यह तथ्य सामने आया कि न्याय के नैसर्गिक सिद्धांत के अनुसार नाबालिग को चौकी पर बैठाना उचित नहीं था। इसके आधार पर दोनों उप निरीक्षकों अनुराग और ईशान वर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।

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मीडिया सेल, पुलिस कमिश्नरेट आगरा द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि मामला दो किशोरों के बीच मारपीट से जुड़ा था और दोनों पक्षों में समझौता हो गया था। पुलिस का दावा है कि छात्र का मेडिकल और एक्स-रे कराया गया, जिसमें किसी प्रकार के फ्रैक्चर की पुष्टि नहीं हुई। विस्तृत जांच सहायक पुलिस आयुक्त अछनेरा द्वारा की जा रही है। यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब किरावली थाना पुलिस पहले भी बर्बरता के आरोपों को लेकर विवादों में रही है। पूर्व में किसान पिटाई प्रकरण और अन्य मामलों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए थे। अब इस ताजा मामले ने फिर पुलिस की छवि को कठघरे में ला खड़ा किया है।

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सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि समझौता हो चुका था तो नाबालिग को चौकी में रोके रखने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या वास्तव में रुपये की मांग की गई थी? मेडिकल रिपोर्ट और परिजनों के दावों में अंतर क्यों है? और यदि छात्र परीक्षा देने की स्थिति में नहीं रहा तो उसकी शैक्षणिक क्षति की जिम्मेदारी कौन लेगा? फिलहाल दोनों दरोगाओं के निलंबन के साथ विभागीय जांच जारी है। अब देखना यह है कि जांच की अंतिम रिपोर्ट क्या निष्कर्ष सामने लाती है और क्या इस प्रकरण में विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ आपराधिक मामला भी दर्ज किया जाएगा।
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