Agra News: लेडी लॉयल अस्पताल में नवजात को बेचने की कोशिश, चाइल्ड लाइन की सतर्कता से बची मासूम की जिंदगी

personसंपादकीय टीम
calendar_today14 Apr 2026, 10:28 pm
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आगरा। जिला महिला अस्पताल (लेडी लॉयल) में इंसानियत को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक नवजात शिशु को बेचने का प्रयास उसके ही माता-पिता द्वारा किया जा रहा था। समय रहते चाइल्ड लाइन की टीम ने सटीक सूचना पर कार्रवाई करते हुए बच्चे को सुरक्षित बचा लिया। इस घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और परिसर में सक्रिय संभावित बच्चा तस्करी गिरोह या बिचौलियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार ग्यासपुरा निवासी एक महिला ने शुक्रवार को लेडी लॉयल अस्पताल में बेटे को जन्म दिया था। शनिवार और रविवार की छुट्टी के दौरान दंपति ने नवजात का सौदा कमलानगर निवासी एक व्यापारी से करने की योजना बनाई। इसकी भनक बच्चे की दादी को लग गई, जिन्होंने बिना देरी किए चाइल्ड लाइन को गुप्त सूचना दे दी कि अस्पताल परिसर में ही नवजात को बेचने की तैयारी चल रही है।

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सूचना मिलते ही चाइल्ड लाइन के कॉर्डिनेटर ब्रजेश गौतम अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और स्थानीय पुलिस की मदद से अस्पताल परिसर में दबिश दी। मौके पर दोनों पक्षों को संदिग्ध स्थिति में पकड़ा गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि एक पक्ष बच्चे को बेचने की फिराक में था, जबकि दूसरा पक्ष इसके बदले मोटी रकम देने को तैयार था। चाइल्ड लाइन टीम ने तत्काल नवजात को अपनी सुरक्षा में लेकर मेडिकल जांच के लिए भेजा और पूरे मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दी। बाद में बच्चे को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए दंपति से बॉन्ड भरवाया गया और सख्त चेतावनी के साथ बच्चे को उनके सुपुर्द कर दिया गया।

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चाइल्ड लाइन के कॉर्डिनेटर ब्रजेश गौतम ने बताया कि बच्चा पूरी तरह सुरक्षित है और भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए माता-पिता को कड़ी हिदायत दी गई है। वहीं अस्पताल प्रशासन ने भी इस घटना को गंभीरता से लेते हुए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकने के निर्देश जारी किए हैं। एसआईसी डॉ. प्रेमलता ने बताया कि अस्पताल परिसर में इस तरह की घटना बेहद चिंताजनक है। आगे से ऐसी किसी भी गतिविधि पर सख्त नजर रखी जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर अस्पताल जैसे सुरक्षित माने जाने वाले स्थानों में भी नवजातों की खरीद-फरोख्त जैसी घटनाएं कैसे संभव हो रही हैं। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है।
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